फेसबुक से बनी गर्लफ्रेंड से सेक्स-2

Facebook se bani girlfriend se sex-2

फिर हम दोनों एक जूस की दुकान पर गए और साथ में जूस पिया। मैंने कविता से कोचिंग क्लास के बारे में जानकारी ली और पूछा कि कमरे पर वहां अकेले ही रहेगी क्या?
कविता ने बताया कि उसकी एक सहेली है वह भी साथ रहेगी।

यह सुनते ही मुझे दुख हुआ कि शायद अब हम नहीं मिल पाएंगे क्योंकि दिन में तो वहां क्लास में जाएगी और शाम को उसकी सहेली साथ रहेगी जो उसके साथ ही पढ़ाई कर रही है।

जूस खत्म करने के बाद मैंने उसे कमरे पर छोड़ा और मैं भी मेरे घर आ गया।

फिर रात को मैंने उसे फोन किया तो उसने कहा- मैं यहां पढ़ने के लिए आई हूँ तो बात कम हो पाएगी।
वह पढ़ने में कोई भी परेशानी नहीं चाहती थी।
मैंने भी उसका साथ दिया और बार बार फोन करके परेशान नहीं किया जैसा कि मैंने शुरू में वादा किया था।

लेकिन मुझे उससे मिलना था।
1 दिन शनिवार था तब मैंने कविता से बात की और पूछा- क्या रविवार को भी क्लास में जाना होता है?
उसने मना कर दिया।

मैंने उससे कहा- जानू मुझे आपसे मिलना है अच्छे से, आपको गले लगाना है, आपकी आंखों को चूमना है, आपके गालों पर हाथ फेरना है आपकी जुल्फें संवारनी हैं।

मेरी इस तरह की बातें सुनकर वह भावनाओं में बह गई और उसने कहा- आज शनिवार है इसलिए उसकी सहेली घर जा रही है और वह अकेली रहने वाली है। तो आज रात को आ सकते हो क्या?
यह सुनकर मैं बहुत खुश हुआ।

लेकिन घर पर कैसे बताता कि रात को मैं बाहर जाना चाहता हूं।
फिर मैंने बहाना बनाया कि दोस्त के घर जा रहा हूं, उसके घर आज कोई नहीं है तो उसने बुलाया है।
पापा ने पहले तो मना कर दिया लेकिन फिर मान गए।

फिर मैं अच्छे से तैयार हुआ और उसके लिए एक चॉकलेट ली। आप तो जानते ही होंगे लड़कियों को चॉकलेट बहुत पसंद होती है.

मैंने अपनी बाइक निकाली और उसकी कमरे की तरफ चला गया।
उसके कमरे के पास आकर मैंने उसको फोन किया और कहा- आप कहां हो; बाहर आओ।

थोड़ी देर में वह बाहर आई।
हाय ,,, वह क्या लग रही थी दोस्तो!
सड़क किनारे हल्की रोशनी में वह बहुत अच्छी लग रही थी।

उसने कहा कि बाइक यहां नहीं रख सकते वरना सब को पता चल जाएगा।
इसका भी इलाज मैंने ढूंढ लिया और अपने दोस्त को फोन लगाया और बाइक उसको दे दी।

और फिर अंधेरे में मैंने कविता का हाथ पकड़ा और उसके साथ चल पड़ा. वह मुझे सीढ़ियों के सहारे घर के सबसे ऊपर छत पर बने कमरे में ले गई। वहां सिर्फ एक कमरा था।

जाते ही मैंने उसे जोर से गले लगा लिया।

हाय क्या अहसास था दोस्तो … आज पहली बार हम गले मिले थे। उसको मैंने और कस के गले लगाया और अपनी आंखें बंद कर ली और धीरे से उसके गले पर किस किया।
लेकिन उसने कहा- खुद को संभालो रोमी थोड़ी देर और!

कविता ने दरवाजा बंद किया।
जैसे ही दरवाजा बंद किया, मैंने उसे फिर पकड़ लिया और उसके गाल आंख नाक पूरे चेहरे पर चूमने लगा।
वो भी मेरा साथ देने लगी और मुझे कस के गले लगाने लगी।

बातों बातों में बताना भूल गया कि उसने काली लेगी और हरे रंग का शर्ट पहना था और बाल खुले थे। शायद वह मेरे लिए ही सज संवर कर तैयार हुई थी।

कविता ने कहा- कुछ देर रुको रोमी. मुझे जी भर के तुम्हें देख तो लेने दो।
अब हम दोनों एक दूसरे के पास बैठे और कुछ बातें करने लगे।

कविता बिल्कुल क़यामत लग रही थी. मेरा मन कर रहा था कि अभी मैं पकड़ कर उसे बहुत सारा प्यार कर लूं।
लेकिन पहले मेरी जान के लिए जो चॉकलेट लाया था वह तो खिला दूँ।

मैंने उसे चॉकलेट निकाल कर दी, उसको देख कर बहुत खुश हुई। उसने मेरे करीब आकर मेरे गाल पर चूम लिया।
वह मेरे बिल्कुल करीब बैठी थी मेरे पैर उसकी जाँघों से छू रहे थे।

कविता ने चॉकलेट खोली, फिर मुझसे कहा- जान आंखें बंद करो.
मैंने आंखें बंद कर ली।

कुछ देर बाद मुझे होंठों पर कुछ एहसास हुआ मुझे लगा कि शायद कविता मुझे किस कर रही है तो मैं भी आगे बढ़ा। लेकिन वहां चॉकलेट का टुकड़ा था. मैं उसे आंखें बंद कर खाने लगा कि अचानक मुझे कविता की होंठों का स्पर्श मिला और मैं बहुत उत्साहित हो गया।

कविता को मैंने बांहों में भर लिया. कविता मेरी गोद में आ गई और उसकी चॉकलेट से भीगे हुए होंठों से मुझे किस करने लगी। कविता मोरे पूरे चेहरे पर किस करने लगी।
हम दोनों ने उस चॉकलेट को इसी तरह खाया।

कविता अभी मुझे किस कर रही थी। लगभग 10 मिनट तक यह सिलसिला चलता रहा। इस दौरान मेरा लंड सलामी देने लगा था और पैंट में मचलने लगा था मुझे कुछ दर्द सा भी हो रहा था। कविता भी पूरी तरह गर्म हो चुकी थी। फिर मुझे होश आया कि लाइट चालू है और बिस्तर लगा हुआ नहीं है।

तब कविता ने बिस्तर लगाया और मैंने लाइट बंद कर दी और कविता की तरफ बढ़ा। फिर से हम दोनों एक दूसरे की बांहों में आ गए एक दूसरे को चूमने लगे।

मैंने कविता की कुर्ती उतार दी और उसे गले और चेहरे पर बेइंतेहा चूमने लगा. कविता भी मेरा पूरा साथ दे रही थी; उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थी। कविता की सिसकारियां मुझे और उत्साहित कर रही थी।

कविता ने मेरा टीशर्ट निकाला और पैंट भी उतारने लगी।
मैंने भी कविता की ब्रा खोल दी।

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अब हम बिस्तर पर लेट गए और एक दूसरे को बहुत चूमने लगे। मैंने भी कविता लेगी उतार दी और पेंटी भी उतार दी। अब हम दोनों के बदन पर एक भी कपड़ा नहीं था।
आज तक हम दोनों ने सिर्फ फोन पर सेक्स सेट किया था; पहली बार हम एक दूसरे के साथ थे। क्या अहसास था वो … सिर्फ मैं महसूस कर सकता हूं।

कविता मुझे सीधा लेटा कर किस करते हुए मेरे लंड की तरफ बढ़ने लगी और मेरे लंड को अपने हाथों से हिलाने लगी।
मैं इस सबका मजा ले रहा था. तभी कविता में मेरा लंड अपने मुंह में ले लिया।

इससे मैं बहुत उत्साहित हो गया, मैंने अपनी कविता के बालों को पकड़ा और उसके मुंह को अपने लंड पर दबाने लगा। कुछ देर तक कविता मेरे लंड को बहुत अच्छे से प्यार करती रही।

अब मेरी बारी थी … मैंने कविता को ऊपर खींचा और सीधा लिटा कर उसके होंठ पर किस करने लगा और चूमते हुए उसके बूब्स को दबाने लगा। धीरे धीरे उसको गले पर चलते हुए उसके एक बूब को अपनी जबान से सहलाने लगा और फिर पूरे बूब को गीला करके निप्पल अपने मुंह में ले लिया।

कविता बहुत उत्तेजित हो गई और ‘आह उह उम्ह’ ऐसी आवाजें निकालने लगी। कविता इतनी गर्म हो गई थी कि वह अपनी चूत उठाने लगी थी. अब मैं उसकी कमर को सहलाते हुए और चूमते हुए उसकी चूत की तरफ बढ़ा।

उसकी चूत से बहुत अच्छी महक आ रही थी। पहले तो मैंने उसकी चूत पर हाथ फिराया। इससे वह मचल उठी और मेरे बाल पकड़कर मेरे मुंह को चूत पर लगाने लगी।
मैं भी कविता की चूत को अपनी जबान से चाटने लगा। कविता की मादक आवाज मुझे उत्साहित कर रही थी।
बहुत देर तक मैंने चूत को चाटा।

अब कविता मुझे ऊपर आने के लिए कह रही थी। मुझसे भी अब बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैंने कविता की चूत पर अपना लंड फिराना शुरू कर दिया।
कविता अपनी चूत उठाकर मेरे लंड का स्वागत करने के लिए तैयार थी।

फिर मैंने कविता को अपनी बांहों में कस कर पकड़ा और उसकी चूत में जोर से धक्का मारा. मेरा आधा लंड कविता की चूत में चला गया। कविता के मुंह से जोर से आवाज निकल गई। मैंने तुरंत उसका मुंह दबा दिया। फिर कुछ देर तक मैं ऐसे ही रुका रहा।

शायद कविता ने पहले कभी नहीं चुदवाया था। कुछ देर आराम करने के बाद मैंने एक और झटका मारा। कविता बड़ी मुश्किल से अपना दर्द बर्दाश्त कर पा रही थी।
मैं उसके बालों को सहलाने लगा उसकी आंखें नम हो गई थी। मैंने उसकी आंखों को पोछा और उसे सहलाने लगा उसे प्यार करने लगा।

फिर मैं धीरे धीरे धक्के भी मारने लगा।

कविता को अच्छा लगने लगा। अब मैंने अपने धक्कों की रफ्तार कुछ बढ़ा दी। कविता को मजा आने लगा और मुझे भी।
आधे घंटे तक चुदाई की उसके बाद हम दोनों झड़ गए।

मैं कविता पर ही लेट गया। वह मेरे बालों को सहलाने लगी।

कुछ देर बाद कविता ने कहा- आई लव यू रोमी। मेरी जिंदगी में तुम पहले हो जिसके साथ मैंने यह सब किया है. प्लीज कभी धोखा मत देना।
मैंने कहा- तुम्हारी कसम जान, मैं तुम्हें कभी धोखा नहीं दूंगा।

और इस तरह हमने रात भर चुदाई की। अगली सुबह जल्दी मैं वहां से निकल गया। कविता बहुत उदास हुई।
बाद में फोन पर रोने भी लगी।

दोस्तो, कविता को मैंने कभी धोखा नहीं दिया. हमारा संबंध 4 साल तक रहा। इस दौरान वह जयपुर से वापस उसके घर चली गई लेकिन कभी कबार वहां बहाना बनाकर मुझसे मिलने आती थी। और फोन पर सेक्स चैट भी किया करते थे. वह मुझे अपनी चूत की फोटो भी भेजती थी और मैं भी अपने लंड की फोटो भेजता था। हम बहुत मजे करते थे।

लेकिन अब हमारी बात नहीं होती। कुछ कारणों से हम अलग हो गए।

तो दोस्तो, आपको मेरी गर्लफ्रेंड की सेक्स स्टोरी कैसी लगी? मेल करके बताना!

HotSexStory.xyz में कहानी पढ़ने के लिये आपका धन्यवाद, हमारी कोशिश है की हम आपको बेहतर कंटेंट देते रहे!

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